वीरभद्र सिंह की विरासत को लेकर कांग्रेस में फिर सियासी घमासान
प्रतिभा सिंह ने रोहड़ू दौरे में पूर्व मुख्यमंत्री की अनदेखी पर उठाए सवाल, आयोजकों पर साधा निशाना

शिमला 06 अक्टूबर चांपा न्यूज़ एक्सप्रेस (ब्यूरो)
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत को लेकर कांग्रेस के भीतर एक बार फिर सियासी घमासान तेज होता नजर आ रहा है। वीरभद्र सिंह की धर्मपत्नी एवं कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के हालिया रोहड़ू और रामपुर दौरे के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री की अनदेखी को लेकर तीखी नाराजगी जाहिर की है।प्रतिभा सिंह ने रोहड़ू में कहा कि वीरभद्र सिंह को दुनिया से विदा हुए अभी चार-साढ़े चार वर्ष ही हुए हैं और इतनी जल्दी उन्हें भुला दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि रोहड़ू वीरभद्र सिंह की प्रमुख राजनीतिक कर्मभूमि रही है और यहीं से उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर को आगे बढ़ाया था। इसके बावजूद मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान लगाए गए आधिकारिक पोस्टरों में वीरभद्र सिंह की तस्वीर नजर नहीं आई और मंच से भी उनके योगदान का उल्लेख नहीं किया गया।उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन या आयोजकों ने तस्वीर नहीं लगाई थी तो उनके समर्थक और चाहने वाले स्वयं पोस्टर लगवा सकते थे।

कम से कम मंच से उनके विकास कार्यों का जिक्र जरूर किया जाना चाहिए था, ताकि नई पीढ़ी उनके योगदान को जान सके।प्रतिभा सिंह ने कहा कि सिरमौर जाने पर कांग्रेस नेता हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार का नाम सम्मान के साथ लेते हैं। उसी तरह वीरभद्र सिंह ने भी हिमाचल के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और उनकी विरासत को याद रखना हर कांग्रेसी का दायित्व है।वीरभद्र सिंह छह बार हिमाचल के मुख्यमंत्री रहे तथा कई बार सांसद और विधायक चुने गए। उनके सम्मान और प्रतिमा स्थापना को लेकर भी पूर्व में कांग्रेस सरकार के भीतर मतभेद सामने आ चुके हैं। अब प्रतिभा सिंह के बयान के बाद यह मुद्दा फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। भाजपा ने भी इसे लेकर सुक्खू सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।