उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्राओं से साझा किए आपदा प्रबंधन के अनुभव

उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्राओं से साझा किए आपदा प्रबंधन के अनुभव

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चंबा 12 फरवरी मुकेश कुमार (गोल्डी)

उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने आज दिल्ली विश्वविद्यालय के कालिंदी कॉलेज के भूगोल विभाग की बी.ए. तृतीय वर्ष की छात्राओं के साथ संवाद करते हुए प्रशासनिक कार्यप्रणाली, आपदा प्रबंधन तथा राहत एवं पुनर्वास से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में त्वरित निर्णय क्षमता, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी प्रभावी प्रबंधन की कुंजी होती है।उपायुक्त ने बताया कि जिला प्रशासन आपदा के दौरान पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, राजस्व, आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न विभागों के समन्वय से राहत, बचाव, क्षति आकलन और पुनर्वास कार्यों को समयबद्ध ढंग से संचालित करता है, ताकि प्रभावित लोगों को शीघ्र सहायता मिल सके और सामान्य जनजीवन जल्द बहाल हो।

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उन्होंने गत वर्ष श्री मणिमहेश यात्रा के दौरान प्राकृतिक आपदा से उत्पन्न चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए बताया कि बहु-विभागीय समन्वय से फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालना, उन्हें त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना, अस्थायी आश्रय और भोजन की व्यवस्था करना तथा मार्गों की शीघ्र बहाली प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही। समयबद्ध निर्णय और स्थानीय समुदाय के सहयोग से स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया।मुकेश रेपसवाल ने हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का निर्माण और क्रियान्वयन किया जाता है। उन्होंने छात्राओं द्वारा पूछे गए प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर भी दिए।इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त अमित मैहरा ने आपदा के समय अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं और राहत प्रबंधन प्रणाली की जानकारी दी।

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संवाद सत्र का संचालन राजकीय महाविद्यालय चंबा के प्रोफेसर डॉ. प्रशांत रमण रवि ने किया। उन्होंने बताया कि 7 से 12 फरवरी तक छात्राओं ने चंबा जिले में “बहु-आपदा संवेदनशीलता और जोखिम आकलन” विषय पर क्षेत्रीय अध्ययन किया। डॉ. शालिनी शिखा, डॉ. अवध नारायण चौबे और डॉ. गणेश यादव के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने गांवों में सर्वेक्षण और भरमौर क्षेत्र में केस स्टडी के माध्यम से आपदा जोखिम और सामुदायिक लचीलेपन का अध्ययन किया। छात्राओं ने इस संवाद को अत्यंत ज्ञानवर्धक बताते हुए जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया।

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