शिमला में राष्ट्रीय महिला आयोग का राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम, उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा पर मंथन

शिमला, 13 फरवरी चम्बा न्यूज़ एक्सप्रेस (ब्यूरो)
राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा शिमला, हिमाचल प्रदेश में उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्राओं की सुरक्षा को लेकर राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आयोग की माननीय अध्यक्षा विजया राहतकर ने की। इस परामर्श में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, रजिस्ट्रार, वरिष्ठ शिक्षाविद, राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, शिमला प्रशासन के प्रतिनिधि, छात्र नेता एवं अधिवक्तागण शामिल हुए।परामर्श कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु संवाद को सुदृढ़ करना तथा मौजूदा संस्थागत तंत्र को अधिक प्रभावी बनाना रहा।

अपने संबोधन में माननीय अध्यक्षा विजया राहतकर ने कहा कि विश्वविद्यालयों में गठित आंतरिक समितियाँ केवल औपचारिक न रहकर व्यवहारिक रूप से सक्रिय होनी चाहिए। उन्होंने पारदर्शिता, जवाबदेही और गोपनीयता के साथ शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर जोर देते हुए कहा कि इससे छात्राओं का संस्थान पर विश्वास बढ़ता है, जो एक सुरक्षित परिसर की पहचान है।परामर्श के दौरान कुलपतियों एवं वरिष्ठ शिक्षाविदों ने सुझाव दिया कि परिसरों में नियमित जागरूकता कार्यक्रम, लैंगिक संवेदनशीलता प्रशिक्षण, छात्र-शिक्षक संवाद मंच तथा आंतरिक समिति की समीक्षा बैठकों को संस्थागत स्वरूप दिया जाए। साथ ही, शिकायत निवारण तंत्र को डिजिटल माध्यमों से अधिक सुलभ बनाने, स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रियाएँ विकसित करने तथा छात्रावास एवं परिसर की सुरक्षा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया।

राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने शिक्षण संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र, हेल्पलाइन जागरूकता, नियमित आउटरीच कार्यक्रम एवं छात्राओं के लिए सुरक्षा मार्गदर्शन सत्र आयोजित करने की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच सूचना साझा करने एवं आपातकालीन सहयोग प्रणाली को मजबूत करने के सुझाव भी दिए।परामर्श कार्यक्रम में POSH प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन, शिकायत निवारण तंत्र को सशक्त बनाने तथा पुलिस-प्रशासन और शिक्षण संस्थानों के बीच समन्वय को और मजबूत करने जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।

प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत विचारों और सुझावों ने उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा और अधिकारों के संरक्षण के लिए ठोस कार्यनीति तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होने का विश्वास व्यक्त किया गया।