मनुष्य जीवन का उद्देश्य प्रभु प्राप्ति, निरंकारी सत्संग में महात्मा देस राज जी का संदेश

मनुष्य जीवन का उद्देश्य प्रभु प्राप्ति: निरंकारी सत्संग में महात्मा देस राज जी का संदेश

डलहौजी/चम्बा 16 फरवरी मुकेश कुमार (गोल्डी)

स्थानीय निरंकारी सत्संग भवन बनीखेत में बीते कल साप्ताहिक सत्संग का आयोजन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ किया गया। इस अवसर पर चुवाड़ी से पधारे महात्मा देस राज ने प्रवचन करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन में आने का एकमात्र उद्देश्य प्रभु प्राप्ति है। उन्होंने बताया कि जब तक आत्मा प्रभु को नहीं जान लेती, तब तक वह चौरासी लाख योनियों के चक्र में भटकती रहती है।महात्मा देस राज जी ने कहा कि आज प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रूप में भक्ति कर रहा है, लेकिन अधिकतर लोग ईश्वर को बिना देखे ही स्मरण करते हैं। जब कोई जिज्ञासु पूर्ण सतगुरु की शरण में जाता है, तभी उसे उसी क्षण कण-कण में व्याप्त निरंकार परमात्मा के साक्षात दर्शन प्राप्त होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि युगों-युगों से ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति केवल पूर्ण सतगुरु के माध्यम से ही संभव हुई है।

अपने प्रवचनों में उन्होंने वर्तमान समय में सतगुरु माता सुदीक्षा ज महाराज का उल्लेख करते हुए कहा कि वे आज भी ब्रह्मज्ञान प्रदान कर मानव जीवन को सार्थक बना रही हैं। सतगुरु की कृपा से ही इंसान ईश्वर को पहचानकर अपने जीवन के वास्तविक लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।इस सत्संग के दौरान उपस्थित साध संगत ने भजनों और आध्यात्मिक विचारों के माध्यम से ईश्वर का गुणगान किया। वातावरण भक्ति, प्रेम और शांति से परिपूर्ण रहा। कार्यक्रम में शाखा प्रबंधक महात्मा एच.एस. गुलेरिया जी ने आपसी भाईचारे, प्रेम और मिल-बाँटकर रहने का संदेश दिया तथा समाज में सौहार्द बनाए रखने का आह्वान किया।सत्संग का समापन सभी के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा और आत्मिक शांति का संदेश लेकर हुआ।

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