डलहौजी क्लब की लीज समाप्ति पर फिर बढ़ी हलचल, उपायुक्त चंबा मुकेश रेपसवाल ने बैठक कर स्थल का किया निरीक्षण

डलहौजी/चम्बा 16 फरवरी मुकेश कुमार (गोल्डी)
डलहौजी क्लब की लीज एग्रीमेंट के समापन को लेकर क्लब के सदस्यों और लीज धारकों के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इसी सिलसिले में बीते दिनों उपायुक्त चंबा मुकेश रेपसवाल विशेष तौर पर डलहौजी पहुंचे और पूरे मामले की गंभीरता से समीक्षा की।उपायुक्त ने क्लब परिसर का दौरा कर संबंधित पक्षों से विस्तारपूर्वक बातचीत की और अब तक की स्थिति की जानकारी ली। सूत्रों के अनुसार, डलहौजी क्लब आज़ादी से पहले ब्रिटिश आर्मी के अधीन रहा है। देश की आज़ादी के बाद प्रदेश सरकार द्वारा यह संपत्ति भारतीय सेना को लीज पर दी गई थी, जबकि इसका स्वामित्व हिमाचल प्रदेश के राजस्व विभाग के पास ही बना रहा।जानकारी के मुताबिक, डलहौजी क्लब का लीज एग्रीमेंट वर्ष 1995 में ही समाप्त हो चुका था। इसके बाद से अब तक क्लब की देखरेख और संचालन भारतीय सेना एवं डलहौजी क्लब संस्था द्वारा किया जा रहा है। संस्था का गठन इसी उद्देश्य से किया गया था ताकि क्लब की संपत्ति का रखरखाव और गतिविधियां सुचारू रूप से चलती रहें।डलहौजी क्लब संस्था में कई प्रभावशाली लोग सदस्य बताए जाते हैं, जिनमें उपाध्यक्ष कैप्टन जी.एस. ढिल्लों, धीरज खन्ना और पूर्व विधायिका आशा कुमारी शामिल हैं। बावजूद इसके, लीज समाप्त हुए लगभग 30 वर्ष बीत जाने के बाद भी नए एग्रीमेंट या किसी ठोस समझौते का न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।इस पूरे मामले को लेकर उपायुक्त चंबा मुकेश रेपसवाल ने बताया कि उन्होंने हाल ही में डलहौजी पहुंचकर सभी पहलुओं की अपने स्तर पर समीक्षा की है और विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश सरकार को प्रेषित कर दी गई है। अब आगे का निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाएगा। स्थानीय लोगों और क्लब सदस्यों की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।