भरमौर के चौरासी मंदिर में लंगर आयोजन पर प्रशासन ने बदला फैसला, पूर्व अनुमति की शर्त समाप्त

भरमौर/ चम्बा 20 मार्च मुकेश कुमार (गोल्डी)
हिमाचल प्रदेश के चौरासी मंदिर परिसर में लंगर व भंडारे के आयोजन को लेकर प्रशासन ने अपने पूर्व आदेश में बड़ा बदलाव किया है। अब श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को लंगर आयोजित करने के लिए किसी प्रकार की पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। प्रशासन के इस संशोधित निर्णय से क्षेत्र में राहत और संतोष का माहौल है।दरअसल, हाल ही में नवरात्रि के दौरान प्रशासन द्वारा जारी एक एडवाइजरी में लंगर और भंडारे के आयोजन पर कुछ शर्तें लागू की गई थीं। इसमें एक दिन के लंगर के लिए 1000 रुपये और दो दिन के लिए 2500 रुपये स्वच्छता शुल्क निर्धारित किया गया था। साथ ही, आयोजकों को कार्यक्रम से तीन दिन पहले प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य किया गया था। इस फैसले के बाद स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों में भारी नाराजगी देखने को मिली थी।

मामले ने तूल पकड़ने के बाद प्रशासन ने म अपना स्पष्टीकरण जारी किया। नए आदेश के तहत अब लंगर व भंडारे के आयोजन के लिए पूर्व अनुमति की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा, स्वच्छता शुल्क को भी अनिवार्य न रखते हुए इसे ऐच्छिक सहयोग के रूप में माना जाएगा।स्थानीय लोगों का कहना है कि चौरासी मंदिर परिसर में लंगर और भंडारे की परंपरा सदियों पुरानी है और इसे किसी प्रशासनिक प्रक्रिया से जोड़ना उचित नहीं था। उनका मानना है कि यह धार्मिक आस्था और सेवा भाव से जुड़ी परंपरा है, जिसे सहज रूप से जारी रहना चाहिए।प्रशासन के इस फैसले के बाद श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली है और उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए ऐसे निर्णय लिए जाएंगे।