बनीखेत में साप्ताहिक निरंकारी सत्संग का आयोजन, सतगुरु महिमा और मानवता का दिया

बनीखेत में साप्ताहिक निरंकारी सत्संग का आयोजन, सतगुरु महिमा और मानवता का दिया

डलहौजी/ चम्बा 29 मार्च मुकेश कुमार (गोल्डी)

स्थानीय निरंकारी सत्संग भवन बनीखेत में साप्ताहिक सत्संग का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया। इस अवसर पर महात्मा रतन चंद जी ने सत्संग को संबोधित करते हुए सतगुरु की महिमा और ब्रह्म ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला।महात्मा रतन चंद ज ने अपने प्रवचन में कहा, “गुरु दिखावे, गुरु मनावे, गुरु ही प्यार सिखांदा ए, बिन गुरु भक्ति मूल न होवे, जो करदा पछतांदा ए।” उन्होंने बताया कि इस संसार में केवल सतगुरु के माध्यम से ही परम पिता परमात्मा को जाना जा सकता है। ब्रह्म ज्ञान को सृष्टि का सर्वोच्च ज्ञान बताते हुए उन्होंने कहा कि यह ज्ञान समर्थ सतगुरु द्वारा जिज्ञासु भक्त को प्रदान किया जाता है, जिसका उद्देश्य मनुष्य को 84 लाख योनियों के चक्र से मुक्त करना है।

उन्होंने आगे कहा कि पूर्ण सतगुरु ही भक्त का सीधा संबंध परमात्मा से जोड़ता है और उसे कण-कण में व्याप्त निराकार प्रभु के दर्शन कराता है। परमात्मा हर स्थान पर विद्यमान है, लेकिन उसका सच्चा बोध केवल सतगुरु की कृपा से ही संभव है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि परमात्मा के ज्ञान का वास्तविक आनंद तभी मिलता है जब व्यक्ति सतगुरु के बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन में मानवता, प्रेम और सेवा के मूल्यों को अपनाता है।महात्मा ज ने श्रद्धालुओं को पांच प्रणों को अपने व्यवहारिक जीवन में उतारने का संदेश देते हुए कहा कि यही जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग है। इस अवसर पर चौहड़ा, टप्पर, बाथरी, गोली, डलहौजी और बगडार सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए भक्तों ने भजनों और विचारों के माध्यम से निरंकार प्रभु का गुणगान किया। सत्संग का समापन श्रद्धालुओं के सामूहिक प्रार्थना के साथ हुआ।

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