पुखरी (बनीखेत) में विकास और संस्कृति का संगम, आधुनिक पार्किंग के साथ दीवारों पर जीवंत हुई चंबा की विरासत

पुखरी (बनीखेत) में विकास और संस्कृति का संगम, आधुनिक पार्किंग के साथ दीवारों पर जीवंत हुई चंबा की विरासत

डलहोजी/चम्बा 27 अप्रैल मुकेश कुमार (गोल्डी)

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के डलहौजी उपमंडल की ग्राम पंचायत पुखरी में विकास और सांस्कृतिक संरक्षण का एक अनूठा उदाहरण सामने आया है। पूर्व जिला परिषद सदस्य पवन टंडन की पहल से यहां न केवल बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया गया है, बल्कि स्थानीय कला और परंपराओं को भी खूबसूरती से संजोया गया है।पुखरी क्षेत्र में लंबे समय से पार्किंग की समस्या लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई थी। सड़क किनारे वाहनों के खड़े होने से यातायात बाधित होता था और दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती थी। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए पवन टंडन के प्रयासों से जिला परिषद चंबा द्वारा ‘पार्किंग एट पुखरी’ के चौथे चरण को मंजूरी दी गई। वर्ष 2025-26 के लिए स्वीकृत इस योजना के तहत ₹4,35,096 की राशि खर्च की गई, जिससे अब स्थानीय लोगों और पर्यटकों को काफी राहत मिली है।

इस परियोजना की सबसे खास बात इसकी कलात्मक प्रस्तुति है। पार्किंग स्थल के साथ बने शिला स्तंभ पर चंबा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आकर्षक ढंग से उकेरा गया है। इसमें पारंपरिक वाद्य यंत्र रणसिंगा बजाते लोक कलाकारों और भेड़-बकरियों जैसे स्थानीय पशुधन की नक्काशी देखने को मिलती है। इसके अलावा, ‘ओम’ और ‘शिवलिंग’ की आकृतियां क्षेत्र की धार्मिक आस्था को दर्शाती हैं, वहीं तिरंगे के साथ भारत का मानचित्र देशभक्ति की भावना को उजागर करता है।स्थानीय ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे विकास और संस्कृति के संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। 15वें वित्त आयोग की ग्रांट के तहत पूरा हुआ यह कार्य न केवल सुविधाओं में वृद्धि करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का भी काम करता है। पवन टंडन की यह पहल जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरी है।

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