डलहौजी विधानसभा क्षेत्र में स्मार्ट मीटर की कथित जबरन स्थापना पर मनीष सरीन ने उठाए कई सवाल

डलहौजी विधानसभा क्षेत्र में स्मार्ट मीटर की कथित जबरन स्थापना पर मनीष सरीन ने उठाए कई सवाल

डलहोजी/ चम्बा 28 अप्रैल मुकेश कुमार (गोल्डी)

डलहौजी विधानसभा क्षेत्र (2022 हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव) से पूर्व प्रत्याशी एवं सामाजिक कार्यकर्ता मनीष सरीन ने हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड द्वारा क्षेत्र में स्मार्ट बिजली मीटर लगाए जाने की प्रक्रिया पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि उपभोक्ताओं पर स्मार्ट मीटर लगाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, तथा कई मामलों में मीटर लगाने से इनकार करने पर बिजली आपूर्ति बंद करने की चेतावनी दी जा रही है। यदि यह सत्य है, तो यह उपभोक्ता अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।सरीन ने संसद में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा दिए गए हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा कि स्मार्ट एवं अग्रिम भुगतान मीटर अनिवार्य नहीं हैं, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए वैकल्पिक हैं।उन्होंने इस संदर्भ में विद्युत अधिनियम, 2003 के निम्न प्रावधानों का उल्लेख किया:• धारा 47(5): उपभोक्ता को अग्रिम भुगतान मीटर चुनने का विकल्प देती है — यह व्यवस्था स्वैच्छिक है, बाध्यकारी नहीं।• धारा 43: प्रत्येक उपभोक्ता को बिजली आपूर्ति प्राप्त करने का अधिकार सुनिश्चित करती है।• धारा 56: केवल बकाया राशि की स्थिति में ही आपूर्ति विच्छेदन की अनुमति देती है, अन्य कारणों से नहीं।• धारा 55: मीटर लगाना आवश्यक है, परंतु किस प्रकार का मीटर होगा, यह बाध्यकारी रूप से निर्धारित नहीं किया गया है।इसके अतिरिक्त, सरीन ने हिमाचल प्रदेश विद्युत विनियामक आयोग के नियमों का उल्लेख करते हुए कहा कि:• उपभोक्ताओं को पूर्व सूचना देना और पारदर्शिता बनाए रखना अनिवार्य है।• किसी भी बड़े तकनीकी परिवर्तन से पहले जन-जागरूकता और स्पष्ट जानकारी देना आवश्यक है।• बिना वैध कारण और उचित सूचना के बिजली आपूर्ति बाधित करना नियमों के विरुद्ध हो सकता है।सरीन ने कहा:“स्थानीय जनता को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। बिना जागरूकता के इस प्रकार के बड़े स्तर पर किए जा रहे कार्य दबाव का रूप ले सकते हैं।”उन्होंने स्मार्ट मीटर के व्यवहारिक पहलुओं को लेकर भी कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए:• यदि अग्रिम भुगतान मीटर का शेष धन समाप्त हो जाए, तो क्या तुरंत बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाएगी?• यदि किसी कारण से बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है, तो क्या उपभोक्ता को कोई समायोजन या मुआवजा मिलेगा?• वर्तमान व्यवस्था में विलंब शुल्क का प्रावधान है, तो अग्रिम भुगतान प्रणाली में इसका क्या विकल्प होगा?उन्होंने कहा कि इन बुनियादी प्रश्नों पर स्पष्टता न होने के कारण लोगों में भ्रम और असंतोष का वातावरण बन रहा है, जबकि हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड द्वारा जागरूकता फैलाने के बजाय जल्दबाजी में कार्य किया जा रहा है।इस मुद्दे पर सरीन ने डलहौजी के विधायक डी.एस. ठाकुर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा:“यह विषय सीधे तौर पर आम जनता के दैनिक जीवन और आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है। ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि की स्पष्ट और सक्रिय भूमिका अपेक्षित होती है। अभी तक माननीय विधायक श्री डी.एस. ठाकुर की ओर से कोई ठोस और स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे लोगों में असमंजस और बढ़ रहा है।”सरीन ने आरोप लगाया:“बिना लोगों को इसके लाभ और हानि समझाए जिस प्रकार जल्दबाजी में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, उससे यह एक उद्देश्यपूर्ण कार्रवाई प्रतीत होती है, जो केंद्र की एनडीए सरकार के कुछ विशेष करीबी लोगों को लाभ पहुंचाने की दिशा में हो सकती है। यह भविष्य में एक बड़े घोटाले का रूप ले सकता है।”उन्होंने सरकार और हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड से मांग की:• जबरन स्थापना पर तत्काल रोक लगाई जाए|• आम जनता के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए।• उपभोक्ता अधिकारों और नियमों पर स्पष्ट लिखित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।• पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः स्वैच्छिक रखा जाए।अंत में सरीन ने कहा कि विकास और तकनीकी सुधार आवश्यक हैं, परंतु यह जनता के अधिकारों और विश्वास की कीमत पर नहीं होना चाहिए, तथा जनप्रतिनिधियों को इस विषय पर आगे आकर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

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