मानसिक बीमारी और बौद्धिक दिव्यांगता से ग्रसित व्यक्तियों के अधिकारों पर विद्यार्थियों को किया जागरूक

मानसिक बीमारी और बौद्धिक दिव्यांगता से ग्रसित व्यक्तियों के अधिकारों पर विद्यार्थियों को किया जागरूक

चंबा 21 अगस्त मुकेश कुमार (गोल्डी)

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चंबा के तत्वावधान तथा हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, शिमला के निर्देशानुसार डी.सी.एम. गुरुकुल पब्लिक स्कूल लाचोरी में NALSA Scheme “Legal Services to Persons with Mental Illness and Persons with Intellectual Disabilities Scheme, 2024” के तहत विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक बीमारी एवं बौद्धिक दिव्यांगता से ग्रसित व्यक्तियों के अधिकारों तथा उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार के लिए जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चंबा के सहायक विधिक सहायता रक्षा अधिवक्ता (Assistant Legal Aid Defence Counsel) नवीन सिंह ठाकुर ने विद्यार्थियों को मानसिक बीमारी एवं बौद्धिक दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्तियों के कानूनी अधिकारों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति भी समाज के समान और सम्मानित सदस्य हैं तथा उन्हें सम्मान, गरिमा, समानता और कानूनी अधिकारों की सुरक्षा प्राप्त है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे उनके साथ भेदभाव न करें और उनकी मानसिक स्थिति या दिव्यांगता का मजाक उड़ाने के बजाय सहयोग एवं संवेदनशीलता का व्यवहार अपनाएं।

नवीन सिंह ठाकुर ने भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी देते हुए अनुच्छेद 14 के समानता के अधिकार, अनुच्छेद 21 के जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार, अनुच्छेद 32 के संवैधानिक उपचारों के अधिकार तथा अनुच्छेद 39ए के तहत समान न्याय एवं निःशुल्क विधिक सहायता के महत्व पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम में डॉ. सोनाली गर्ग, अंजलि शर्मा तथा स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि कादम्बरी भी उपस्थित रहे। स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधियों ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य और मानसिक बीमारी से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए जागरूक एवं संवेदनशील रहने के लिए प्रेरित किया।

वक्ताओं ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण और स्वास्थ्य विभाग का संयुक्त उद्देश्य मानसिक बीमारी एवं बौद्धिक दिव्यांगता से प्रभावित लोगों को आवश्यक सहायता, सम्मान तथा उनके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने सभी व्यक्तियों के साथ समानता एवं सम्मान का व्यवहार करने और भेदभाव-मुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।

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