नशा मुक्ति केंद्रों में नशे की शिकायत पर होगी सख्त कार्रवाई, संचालकों को नियमों का पालन अनिवार्य

शिमला 06 अक्टूबर चम्बा न्यूज़ एक्सप्रेस (ब्यूरो)
नशे के खिलाफ जिला प्रशासन के अभियान को प्रभावी बनाने के लिए मंगलवार को बचत भवन शिमला में नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों के संचालकों और संबंधित प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने की। इस दौरान केंद्र संचालकों ने अपनी विभिन्न मांगें भी प्रशासन के समक्ष रखीं।उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि नशा मुक्ति केंद्रों का संचालन निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि ये केंद्र व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उपचार के लिए आने वाले मरीजों को किसी भी प्रकार से नशा उपलब्ध करवाने की शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा। केंद्रों में सुरक्षित और पूर्णतः नशामुक्त वातावरण सुनिश्चित करना संचालकों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल नशा तस्करों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं है। नशे की गिरफ्त में आए व्यक्ति का उपचार, काउंसलिंग, पुनर्वास और उसे परिवार तथा समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी जरूरी है। उपचार के बाद रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा और डॉ. कुशाल वर्मा ने केंद्रों के लिए निर्धारित न्यूनतम मानकों की जानकारी दी। प्रत्येक मरीज का पंजीकरण, यूनिक आईडी, चिकित्सकीय एवं मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन, लिखित सहमति, उपचार संबंधी रिकॉर्ड और डिस्चार्ज समरी रखना अनिवार्य बताया गया। प्रत्येक 30 मरीज पर कम से कम एक पूर्णकालिक प्रशिक्षित काउंसलर की उपलब्धता भी जरूरी है।एसएसपी गौरव सिंह ने कहा कि नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, परिवार, शिक्षण संस्थानों और नशा मुक्ति केंद्रों को मिलकर काम करना होगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी नशा मुक्ति केंद्र में नशे का कारोबार पाया गया तो केंद्र के मालिक के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाएगा, जिसमें गंभीर मामलों में 10 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।