जनजातीय भवनों के अन्य उपयोग पर संगठनों का विरोध, केवल समुदाय के लिए आरक्षित करने की मांग

चम्बा 07 जुलाई मुकेश कुमार (गोल्डी)
हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिला में जनजातीय समुदाय के लिए निर्मित आवासीय परिसरों के अन्य कार्यों में उपयोग किए जाने को लेकर स्थानीय संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। पांगी कल्याण संघ और गद्दी संस्कृति विकास मंच के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त चम्बा को एक मांग पत्र सौंपते हुए इस व्यवस्था को तुरंत बहाल करने की मांग उठाई है।ज्ञापन में प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि चम्बा शहर स्थित ‘जनजातीय सराय’ और बालू स्थित ‘जनजातीय भवन’ का निर्माण विशेष रूप से पांगी, भरमौर और अन्य दूरदराज के जनजातीय क्षेत्रों से आने वाले लोगों की सुविधा के लिए किया गया था।

इन परिसरों का मुख्य उद्देश्य ऐसे लोगों को अस्थायी आवास उपलब्ध कराना था, जो उपचार, शिक्षा, न्यायालय और प्रशासनिक कार्यों के सिलसिले में चम्बा आते हैं।संगठनों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से इन भवनों का उपयोग अपने मूल उद्देश्य से हटकर किया जा रहा है। बालू स्थित जनजातीय भवन में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीम को ठहराया गया है, जबकि चम्बा की जनजातीय सराय का उपयोग गैर-जनजातीय व्यक्तियों और अन्य सरकारी विभागों द्वारा किया जा रहा है।इस स्थिति के कारण दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले गरीब और जरूरतमंद जनजातीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। निजी होटलों का खर्च उठाना उनके लिए संभव नहीं है, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है।

प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से आग्रह किया है कि इन भवनों को शीघ्र खाली करवाकर पुनः जनजातीय समुदाय के लिए आरक्षित किया जाए। साथ ही एनडीआरएफ और अन्य विभागों के लिए वैकल्पिक स्थान पर आवास की व्यवस्था करने की मांग भी उठाई गई है।इस मौके पर कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुरजीत भरमौरी, भगत बड़ोत्रा, शिवदयाल सहित कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।