महंगाई काबू करने में केंद्र सरकार लगातार हो रही फेल मनीष सरीन ने केन्द्र पर साधा निशाना
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डलहौजी/ चम्बा 22 जून मुकेश कुमार (गोल्डी)
डलहौज़ी विधानसभा क्षेत्र के 2022 के पूर्व प्रत्याशी एवं सामाजिक कार्यकर्ता मनीष सरीन ने देश में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए ‘ जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, विशेषकर पश्चिम एशिया में तनाव, तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में संभावित व्यवधानों के चलते भारत में 19 किलोग्राम कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत कई महानगरों में ₹3,100 के करीब पहुंच गई है।सरीन ने कहा कि इस मूल्य वृद्धि का सीधा असर होटल, रेस्तरां, ढाबों, बेकरी, कैटरिंग सेवाओं और छोटे व्यापारियों पर पड़ा है। बढ़ी हुई लागत का बोझ या तो व्यवसायियों को स्वयं उठाना पड़ा या फिर इसे उपभोक्ताओं तक पहुंचाना पड़ा, जिससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ा है।उन्होंने बताया कि उस समय सरकार और तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय संकट और आपूर्ति जोखिमों को मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण बताया था। लेकिन अब जबकि वैश्विक हालात में कुछ सुधार के संकेत मिल रहे हैं और आपूर्ति व्यवस्था भी धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कीमतों में भी उसी तेजी से कमी लाई जाएगी।व्यंग्यात्मक लहजे में सरीन ने कहा, “हमारे यहां महंगाई का जीपीएस केवल ऊपर जाने का रास्ता जानता है। जैसे ही वैश्विक तनाव बढ़ता है, कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, लेकिन हालात सुधरने पर राहत कहीं अटक जाती है।”उन्होंने जोर देकर कहा कि कमर्शियल एलपीजी केवल व्यापारियों का विषय नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव आम जनता पर भी पड़ता है, क्योंकि इससे खाद्य पदार्थों और सेवाओं की कीमतें बढ़ जाती हैं। अंततः इसका बोझ उपभोक्ताओं को ही उठाना पड़ता है।सरीन ने केंद्र सरकार से मांग की कि कमर्शियल एलपीजी और अन्य ऊर्जा उत्पादों की कीमतों की पारदर्शी समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय जोखिम कम हुए हैं, तो उसका लाभ आम नागरिकों तक पहुंचाया जाना चाहिए।अंत में उन्होंने कहा कि जनता जानना चाहती है कि जब संकट के समय कीमतें बढ़ सकती हैं, तो हालात सामान्य होने पर उन्हें घटाने में देरी क्यों हो रही है।