युद्ध में महंगाई का हवाला, शांति में राहत क्यों नहीं? मनीष सरीन ने उठाए सवाल

चंबा 06 जुलाई मुकेश कुमार (गोल्डी)
सामाजिक कार्यकर्ता एवं वर्ष 2022 के हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में डलहौज़ी क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी मनीष सरीन ने पेट्रोल, डीज़ल और वाणिज्यिक एलपीजी की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि जब पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में संकट उत्पन्न हुआ और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल व एलएनजी की कीमतों में उछाल आया, तब देशवासियों को महंगाई का हवाला देकर बढ़ी कीमतें स्वीकार करने को कहा गया।मनीष सरीन ने कहा कि अब स्थिति पहले जैसी नहीं रही है। हॉर्मुज़ में जहाजों की आवाजाही सामान्य हो चुकी है, ऊर्जा आपूर्ति पर तत्काल संकट कम हुआ है और वैश्विक तेल बाजार भी स्थिरता की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब वैश्विक संकट का असर तेजी से आम उपभोक्ताओं तक पहुंचा, तो राहत देने में देरी क्यों हो रही है।उन्होंने कहा कि महंगे ईंधन और वाणिज्यिक एलपीजी की मार आज भी मध्यम वर्ग, किसान, परिवहन क्षेत्र, होटल उद्योग, रेस्तरां और छोटे व्यापारियों पर पड़ रही है। इससे हर परिवार की रसोई और व्यापार की लागत प्रभावित हो रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि मूल्य निर्धारण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सुधार का लाभ शीघ्र जनता तक पहुंचाया जाए।सरीन ने विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जो दल अन्य मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं, वे इस गंभीर विषय पर मौन क्यों हैं। उन्होंने इसे जनता से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बताते हुए कहा कि महंगाई केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर डालने वाला मुद्दा है।उन्होंने अंत में कहा कि जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि वास्तविक राहत चाहती है और सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।