मनीमहेश आपदा प्रबंधन में जुटे प्रशासन पर अभद्र व्यवहार करने वाले वकीलों के खिलाफ कार्रवाई की उठी मांग

चंबा, 01 सितम्बर मुकेश कुमार (गोल्डी)
मनीमहेश यात्रा 2025 के दौरान भारी वर्षा और आपदा की विकट परिस्थितियों में जिला प्रशासन ने मानव जीवन को सुरक्षित निकालने के लिए दिन-रात अथक प्रयास किए। उपायुक्त चंबा सहित प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों, स्थानीय जनता और विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं ने यात्रियों के लिए भोजन, पानी, चिकित्सा, ठहरने, हवाई उड़ानों और बंद सड़कों को खोलने की व्यवस्था की। इस कार्य की प्रशंसा प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से भी मिली। उपायुक्त चंबा स्वयं भारी वर्षा और जोखिम उठाते हुए भरमौर तक पैदल पहुंचे और श्रद्धालुओं की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने में उत्कृष्ट सेवा प्रदान की।

इसी बीच 28 अगस्त 2025 को जिला बार एसोसिएशन के कई अधिवक्ता उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। उस समय उपायुक्त आपदा नियंत्रण कक्ष में यात्रियों को सुरक्षित निकालने और आपदा से निपटने की रणनीति बनाने में व्यस्त थे। लेकिन आरोप है कि कुछ अधिवक्ताओं ने वार्तालाप के दौरान अभद्र भाषा और गाली-गलौच का प्रयोग किया, जिसकी पुष्टि सोशल मीडिया और सीसीटीवी फुटेज से हो सकती है।
प्रशासन का कहना है कि इन वकीलों ने तथ्यहीन बयानबाजी और झूठी अफवाहें फैलाकर श्रद्धालुओं और उनके परिजनों में भय का माहौल पैदा किया। मृतकों की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया तथा चंबा मुख्यालय में नारेबाजी कर 4–5 घंटे तक चक्का जाम किया गया। इससे मृतकों और उनके परिजनों की गाड़ियों को रोका गया और लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।

इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के चंबा प्रवास के दौरान वकीलों द्वारा अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी की गाड़ी को रोककर चालक और सुरक्षा कर्मचारियों से बदसलूकी करने और गाड़ी की चाबी छीनने की घटना भी सामने आई। इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध है। साथ ही यह अफवाह भी फैलाई गई कि मोबाइल नेटवर्क और फोन सेवाएं उपायुक्त द्वारा बंद करवाई गई हैं, जो पूरी तरह असत्य है।
उपायुक्त कार्यालय कर्मचारी महासंघ
उपायुक्त कार्यालय कर्मचारी महासंघने इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि आपदा की गंभीर घड़ी में प्रशासन मानव जीवन बचाने में व्यस्त था। ऐसे में अफवाहें फैलाकर और सरकारी कार्य में बाधा डालकर बार एसोसिएशन के कुछ वकीलों ने अनुचित कार्य किया है। महासंघ ने मांग की है कि इन अधिवक्ताओं के खिलाफ डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।प्रशासन ने पुनः स्पष्ट किया है कि आपदा काल में स्थानीय जनता, समाजसेवी संस्थाओं और विभागों के सहयोग से हजारों यात्रियों को सुरक्षित निकालने में सफलता मिली और इसी को नकारात्मक रूप में पेश करना दुर्भाग्यपूर्ण है।