बनीखेत निरंकारी सत्संग भवन में हुआ साप्ताहिक सत्संग, महात्मा दुनी चंद ने अपने प्रवचनों से संगत को किया निहाल

बनीखेत निरंकारी सत्संग भवन में हुआ साप्ताहिक सत्संग, महात्मा दुनी चंद ने अपने प्रवचनों से संगत को किया निहाल

डलहौजी/चम्बा, 21 सितंबर मुकेश कुमार (गोल्डी)

स्थानीय निरंकारी सत्संग भवन बनीखेत में आज साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रचार टूयर कार्यक्रम के तहत आए हुए जोनल इंचार्ज महात्मा दुनी चंद ने उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रवचन दिए।महात्मा दुनी चंद ने कहा कि “जिसकी भक्ति, जिसकी पूजा – उसका ज्ञान जरूरी है”। हरदेव वाणी के अनुसार पहले ईश्वर की पहचान जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संत निरंकारी मिशन कोई धर्म या संप्रदाय नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक विचारधारा है जो संपूर्ण मानवता को एक सूत्र में पिरोने का कार्य कर रही है।उन्होंने बताया कि मिशन का विश्वास युगों-युगों से पवित्र ग्रंथों में वर्णित उस सत्य पर आधारित है जिसके अनुसार केवल साकार सतगुरु के माध्यम से ही परमपिता परमात्मा का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। आत्मबोध ही मानव जीवन का परम लक्ष्य है और ईश्वर की अनुभूति के माध्यम से ही विश्व-व्यापी भाईचारा, शांति और समृद्धि संभव है।

महात्मा ने कहा कि निरंकारी मिशन सच का संदेश गांव-गांव और देश-विदेश तक पहुंचा रहा है। सच स्वयं परमात्मा है जो हमारे अंग-संग विद्यमान है, और उसकी अनुभूति सतगुरु की कृपा से संभव होती है। यही ब्रह्मज्ञान कहलाता है। उन्होंने बताया कि जब इंसान परमात्मा का दीदार कर लेता है तो उसके जीवन से भ्रम दूर हो जाते हैं और वह निंदा-नफरत से परे होकर सद्मार्ग पर चलता है।उन्होंने यह भी कहा कि परमात्मा को जानने के लिए किसी तपस्या या कठिन साधना की आवश्यकता नहीं है। एक जिज्ञासु साधक पल भर में सतगुरु की कृपा से परमात्मा की सर्वव्यापक सत्ता का अनुभव कर सकता है।महात्मा दुनी चंद जी ने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि निरंकारी होना आचरण और व्यवहार में झलकना चाहिए, केवल शब्दों में नहीं। सौहार्दपूर्ण और मेल-मिलाप वाला व्यवहार ही मिशन की वास्तविक शिक्षा है।

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