चंबा व चुवाड़ी शिक्षा खंडों में सतत् समग्र मूल्यांकन प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी

चंबा व चुवाड़ी शिक्षा खंडों में सतत् समग्र मूल्यांकन प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी

डलहौजी/चंबा, 23 सितम्बर मुकेश कुमार (गोल्डी)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश में शिक्षकों को आधुनिक मूल्यांकन पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी क्रम में चंबा और चुवाड़ी शिक्षा खंडों में सतत् एवं समग्र मूल्यांकन (CCE) पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है। यह पहल राज्य स्तर पर 33,000 शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की बड़ी योजना का हिस्सा है।शिक्षा खंड चुवाड़ी में यह प्रशिक्षण 9 सितम्बर से आरंभ हुआ है और 9 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें बनीखेत, चुवाड़ी और सिहुंता क्षेत्र के प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक भाग ले रहे हैं।

प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को नई मूल्यांकन प्रणाली की बारीकियों से अवगत कराया जा रहा है ताकि वे विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया का आकलन केवल परीक्षाओं तक सीमित न रखकर उसे सीखने और सुधार का साधन बना सकें।चुवाड़ी खंड में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के रिसोर्स पर्सन राजन सिंह रहे। उन्होंने शिक्षकों को ब्लूम टैक्सोनॉमी, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) दक्षताओं और नॉलेज–अंडरस्टैंडिंग–एप्लिकेशन ढाँचे के आधार पर प्रशिक्षण दिया। उन्होंने व्यवहारिक गतिविधियों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया कि किस प्रकार विद्यार्थी की क्षमताओं का समग्र मूल्यांकन किया जा सकता है।

इस अवसर पर ब्लॉक प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर (BPO) चुवाड़ी रेखा की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। वहीं, डाइट चंबा से समन्वयक रविंद्र सिंह राजपूत द्वारा प्रशिक्षण के सफल संचालन में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया जा रहा है।इसी तरह, शिक्षा खंड चंबा में भी समान तिथियों में सतत् समग्र मूल्यांकन प्रशिक्षण आयोजित हो रहा है। यहाँ पर प्रशिक्षक ज्योति शिक्षकों को विभिन्न सत्रों के माध्यम से मार्गदर्शन दे रही हैं। दोनों ही प्रशिक्षण स्थलों पर स्नातक अध्यापक और प्रवक्ता शिक्षक सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

राज्य शिक्षा विभाग का मानना है कि यह प्रशिक्षण शिक्षकों की कार्यशैली में सकारात्मक बदलाव लाएगा। नई प्रणाली से विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया का बेहतर आकलन होगा और मूल्यांकन केवल अंक प्राप्ति का माध्यम न रहकर, सीखने को और प्रभावी तथा रोचक बनाने का साधन बनेगा।यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापरक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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