धर्म विरोधी गतिविधियों के विरोध में वाल्मीकि सभा डलहौजी छावनी के प्रधान अरुण अटवाल का इस्तीफा

डलहौजी, 28 जुलाई मुकेश कुमार (‘गोल्डी’)
वाल्मीकि सभा डलहौजी छावनी में उस समय हलचल मच गई जब सभा के प्रधान अरुण अटवाल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बताया जा रहा है कि उन्होंने यह कदम सभा के कुछ पदाधिकारियों द्वारा कथित रूप से की जा रही धर्म विरोधी गतिविधियों के विरोध में उठाया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, अरुण अटवाल ने अपना लिखित इस्तीफा सभा के उपप्रधान एवं अन्य सदस्यों को सौंप दिया है। इस संबंध में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से सभा के भीतर ऐसे कार्य हो रहे थे जो उनके धार्मिक और सामाजिक मूल्यों के विपरीत हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।अटवाल ने बताया कि उन्होंने पहले भी संबंधित पदाधिकारियों को इन गतिविधियों को बंद करने के लिए कई बार आगाह किया था, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जब बार-बार समझाने के बावजूद भी कथित धर्म विरोधी कार्य जारी रहे, तो उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देना ही उचित समझा।उन्होंने इन गतिविधियों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह के कृत्य समाज में गलत संदेश देते हैं और संगठन की छवि को भी नुकसान पहुंचाते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पद छोड़ने के बावजूद वह समाज और मंदिर की सेवा करते रहेंगे तथा सामाजिक एकता और धार्मिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे।वहीं, जानकारी के अनुसार वाल्मीकि सभा डलहौजी छावनी ने अभी तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है। इस घटनाक्रम के बाद सभा के भीतर स्थिति को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संगठन इस मुद्दे को किस प्रकार सुलझाता है और भविष्य में इसकी कार्यप्रणाली में क्या बदलाव किए जाते हैं।