हॉर्मुज़ से हिमाचल तक असर एलपीजी संकट पर मनीष सरीन का केंद्र सरकार पर हमला

चम्बा 12 अप्रैल मुकेश कुमार (गोल्डी)
हिमाचल प्रदेश में गहराते एलपीजी संकट ने अब आम जनजीवन और प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता और 2022 में डलहौजी विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी मनीष सरीन ने इस मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि देश को “विश्वगुरु” और “आत्मनिर्भर भारत” बनाने के दावों के बीच जमीनी हकीकत यह है कि भारत अब भी अपनी लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी जरूरत आयात से पूरी करता है, जो मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ जैसे संवेदनशील समुद्री मार्ग पर निर्भर है।सरीन ने आरोप लगाया कि हॉर्मुज़ क्षेत्र में किसी भी तरह की हलचल का सीधा असर हिमाचल की रसोई तक पहुंचता है। प्रदेश के कई इलाकों में गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, डिलीवरी में देरी हो रही है और उपभोक्ताओं को अधिक कीमत देकर सिलेंडर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे कालाबाज़ारी के मामले भी सामने आ रहे हैं।उन्होंने कहा कि व्यावसायिक एलपीजी की कमी से होटल, ढाबे और छोटे कारोबारी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। पर्यटन सीजन के दौरान यह संकट और भी गंभीर हो जाता है, जिससे रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। दूरदराज़ और पहाड़ी क्षेत्रों में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, जहां लोग वैकल्पिक ईंधन जैसे लकड़ी और कोयले की ओर लौटने को मजबूर हैं।सरीन ने विपक्ष में बैठी बीजेपी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और पूछा कि क्या प्रदेश के नेताओं ने इस मुद्दे को केंद्र के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाया है। उन्होंने केंद्र सरकार से हिमाचल के लिए अतिरिक्त एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने, कालाबाज़ारी पर सख्त कार्रवाई करने और दीर्घकालिक ऊर्जा नीति बनाने की मांग की है।