“यह आत्महत्या नहीं, सिस्टम द्वारा की गई हत्या है” परीक्षा घोटालों पर मनीष सरीन का केंद्र सरकार पर हमला

डलहौज़ी/ चम्बा 16 मई मुकेश कुमार (गोल्डी)
देशभर में सामने आ रहे लगातार परीक्षा घोटालों और छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं डलहौज़ी विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2022 के पूर्व प्रत्याशी मनीष सरीन ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल व्यक्तिगत असफलता का मामला नहीं, बल्कि एक असंवेदनशील और भ्रष्ट व्यवस्था की विफलता है, जो युवाओं को मानसिक रूप से तोड़ रही है।
मनीष सरीन ने लखीमपुर खीरी के 21 वर्षीय छात्र ऋतिक मिश्रा के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि उसके अंतिम शब्द—“अब नहीं देनी प्रतियोगी परीक्षा”—देश के करोड़ों युवाओं के दर्द को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार परीक्षा रद्द होने और अनिश्चितता के कारण मेहनती छात्र मानसिक दबाव में आकर आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। गोवा में भी एक NEET अभ्यर्थी की आत्महत्या की घटना को उन्होंने इसी व्यवस्था की देन बताया।
सरीन ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2015 से 2026 तक देश में 148 परीक्षा घोटाले सामने आए हैं, जिनमें 87 परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और करीब 9 करोड़ छात्र प्रभावित हुए। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों या राजनीतिक व्यक्तियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई न होना चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों की सक्रियता के बावजूद जवाबदेही तय नहीं हो पाई है।
उन्होंने कहा कि NEET, AIPMT जैसी प्रमुख परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और भ्रष्टाचार के मामले सामने आना इस बात का संकेत है कि देश की परीक्षा प्रणाली पूरी तरह असुरक्षित हो चुकी है। सरीन ने आरोप लगाया कि घोटालों में संलिप्त अधिकारियों को दंडित करने के बजाय उन्हें उच्च पदों पर बैठा दिया जाता है।
हिमाचल प्रदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा और HPSSC के पेपर लीक मामलों ने प्रदेश की छवि को भी प्रभावित किया। इन घटनाओं से हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया।