चंबा हेलीपोर्ट परियोजना 80% पूरी, पर डलहौज़ी जल हवाईअड्डा परियोजना पूर्ण्तः ठप्प—चूक या सुनियोजित उपेक्षा?

चंबा हेलीपोर्ट परियोजना 80% पूरी, पर डलहौज़ी जल हवाईअड्डा परियोजना पूर्ण्तः ठप्प—चूक या सुनियोजित उपेक्षा?

चम्बा 24 अप्रैल मुकेश कुमार (गोल्डी)

समान समय में चिन्हित परियोजनाओं के असमान क्रियान्वयन पर जवाबदेही तय करने की मांग तेजसामाजिक कार्यकर्ता एवं वर्ष 2022 के हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों में डलहौज़ी विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी मनीष सरीन द्वारा 21 अप्रैल 2026 को चंबा स्थित होटल इरावती में आयोजित प्रेस वार्ता में उठाए गए मुद्दों ने अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली और विकास प्राथमिकताओं पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।मनीष सरीन ने बताया कि वर्ष 2023-24 के केंद्रीय बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीथारमन द्वारा UDAN (Ude Desh ka Aam Nagrik) स्कीम के अंतर्गत देश के टियर-3 और टियर-4 शहरों में 50 नए एयरस्ट्रिप, वॉटर एयरोड्रोम और हेलीपोर्ट विकसित करने की घोषणा की गई थी।इस घोषणा के तुरंत बाद मनीष सरीन ने तत्कालीन केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिन्धिआ को पत्र लिखकर डलहौज़ी–चंबा क्षेत्र के लिए हवाई कनेक्टिविटी परियोजनाओं की मांग उठाई। इसके उत्तर में 5 जुलाई 2023 को नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से प्राप्त आधिकारिक पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि डलहौज़ी को वॉटर एयरोड्रोम अर्थात जल हवाईअड्डे तथा चंबा को हेलीपोर्ट के रूप में चिन्हित किया गया है।उन्होंने बताया कि लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप नवंबर 2024 में इन दोनों परियोजनाओं को औपचारिक रूप से UDAN 5.5 के Annexure 1C (डलहौज़ी वॉटर एयरोड्रोम) और Annexure 1D (चंबा हेलीपोर्ट) में शामिल किया गया।प्रेस वार्ता के बाद मनीष सरीन ने इसी विषय पर एक विस्तृत मांग पत्र उपायुक्त चंबा श्री मुकेश रेपस्वाल के माध्यम से मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुखू तथा केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री राम मोहन नायडू किंजरापु को प्रेषित किया।इसी दौरान चंबा हेलीपोर्ट परियोजना को लेकर सदर विधायक श्री नीरज नय्यर द्वारा 23 अप्रैल 2026 को की गई प्रेस वार्ता में जानकारी सामने आई कि यह परियोजना लगभग 80% पूर्ण हो चुकी है और इस पर ₹13 करोड़ का बजट व्यय किया जा रहा है। मनीष सरीन ने इस प्रगति को सकारात्मक बताते हुए कहा कि यह दर्शाता है कि यदि इच्छाशक्ति और समन्वय हो, तो पहाड़ी क्षेत्रों में भी ऐसी परियोजनाएं सफलतापूर्वक लागू की जा सकती हैं।लेकिन इसके साथ ही उन्होंने एक मूलभूत और गंभीर प्रश्न उठाया—जब दोनों परियोजनाएं वर्ष 2023 में चिन्हित हुईं और नवंबर 2024 में एक साथ आधिकारिक सूची में शामिल की गईं, तो एक परियोजना को बजट, प्राथमिकता और तेज़ प्रगति कैसे मिली, जबकि दूसरी परियोजना आज तक प्रारंभिक स्तर पर भी नहीं पहुंच पाई।उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल सामान्य देरी नहीं मानी जा सकती, बल्कि यह प्रशासनिक प्राथमिकताओं और निर्णय प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगाती है। यदि चंबा हेलीपोर्ट परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है, तो डलहौज़ी वॉटर एयरोड्रोम का पूरी तरह ठप्प रहना स्वाभाविक नहीं है।मनीष सरीन ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके द्वारा प्राप्त 5 जुलाई 2023 के आधिकारिक पत्र में नीति स्तर पर दोनों परियोजनाओं की पुष्टि पहले ही हो चुकी थी, जिससे यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि डलहौज़ी परियोजना में अब तक कोई ठोस प्रगति क्यों नहीं हुई।उन्होंने सवाल उठाया कि:• क्या डलहौज़ी वॉटर एयरोड्रोम के लिए कोई DPR या व्यवहार्यता अध्ययन शुरू किया गया?• यदि नहीं, तो इसके पीछे क्या कारण रहे?• और सबसे महत्वपूर्ण—क्या यह मात्र प्रशासनिक चूक है या फिर किसी स्तर पर इस परियोजना को जानबूझकर प्राथमिकता से बाहर रखा गया?मनीष सरीन ने स्पष्ट कहा कि इस पूरे मामले की गहराई तक जांच की जाएगी और जो भी व्यक्ति या स्तर इस विकास परियोजना को आगे बढ़ाने में विफल रहा या इसे जानबूझकर पीछे धकेलने के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसे किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि डलहौज़ी जैसे क्षेत्र को विकास से वंचित कर पिछड़ेपन की ओर धकेलना स्वीकार नहीं किया जाएगा।अंत में उन्होंने राज्य सरकार से इस पूरे मामले पर स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब देने, जिम्मेदारी तय करने तथा डलहौज़ी वॉटर एयरोड्रोम परियोजना को तत्काल प्राथमिकता देने की मांग की।

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