बनीखेत में साप्ताहिक निरंकारी सत्संग आयोजित, मानवता और निःस्वार्थ भक्ति का दिया संदेश

डलहौजी/ चम्बा 19 जुलाई मुकेश कुमार (गोल्डी)
बनीखेत स्थित स्थानीय निरंकारी सत्संग भवन में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ किया गया। इस अवसर पर प्रचार टूर कार्यक्रम के तहत दुनेरा (पंजाब) से पधारे महात्मा डॉक्टर विजय जी ने संगत को संबोधित करते हुए आध्यात्मिक विचार साझा किए और भक्ति, मानवता तथा आत्मिक ज्ञान का महत्व समझाया।महात्मा डॉक्टर विजय जी ने अपने प्रवचनों में कहा कि सच्ची भक्ति तभी संभव है जब मनुष्य परमात्मा को जान लेता है। उन्होंने बताया कि भक्ति निःस्वार्थ और भय रहित होनी चाहिए। परमात्मा इस सृष्टि के कण-कण में विद्यमान है—पत्ते-पत्ते, डाली-डाली और हर जीव में उसका वास है। सभी धर्म ग्रंथ भी इसी सत्य का वर्णन करते हैं।

उन्होंने कहा कि जब मनुष्य परमात्मा को जान लेता है तो उसके भीतर से भय, स्वार्थ और अहंकार स्वतः समाप्त हो जाते हैं तथा नकारात्मक विचारों का अंत हो जाता है।उन्होंने आगे कहा कि मानव जीवन अत्यंत अनमोल है और इसी जीवन में परमात्मा की पहचान करना आवश्यक है। शरीर केवल बाहरी रूप है, जबकि वास्तविक पहचान आत्मिक स्वरूप से होती है। व्यक्ति के व्यवहार से ही यह स्पष्ट होता है कि वह मानवता के मार्ग पर है या नहीं। उन्होंने कहा कि फरिश्ता और शैतान दोनों मानव रूप में ही होते हैं, परंतु उनके गुण ही उन्हें अलग बनाते हैं।महात्मा ने मानवता को सबसे बड़ा धर्म बताते हुए कहा कि जब मन में परमात्मा का वास होता है तो प्रेम, एकता, करुणा, सहनशीलता और अपनत्व जैसे गुण स्वतः विकसित हो जाते हैं।

यही जीवन जीने का सही मार्ग है।इस अवसर पर शाखा प्रबंधक महात्मा एच.एस. गुलेरिया जी ने भी संगत को संबोधित करते हुए कहा कि हमें मन, वचन और कर्म से एक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि निरंकारी मिशन के उपदेशों का पालन करते हुए जीवन में सौहार्द और विनम्रता बनाए रखना ही सच्ची भक्ति है।